जय हिन्द

Monday, February 15, 2010

मुझे तेरा साथ चाहिये......






ऐ मेरे हम सफ़र मुझे तेरा हाथ चाहिये,
जो कभी न ख़त्म हो ऐसा साथ चाहिये...
जिंदगी की राहों में जब मैं आगे बढ़ू,
तो मुझे तेरा साया दिन रात चाहिये...
कभी बिछड़ जाये राहों में गर,
तो कभी न ख़त्म हो वो आस चाहिये...
ज़िन्दगी की खुशियों में तो, कई हमराह मिलेंगे,
जो हर पल साए की तरह दिन रात रहेंगे....
पर मुझे गम के घने अंधेरो में,
तेरा ही साथ चाहिये...
मिलता है समुन्दर में जैसे मोती को सीपी का सहारा,
एक ऐसे ही रिश्ते की तुझसे सौगात चाहिये...
रहती है चांदनी जिस तरह चाँद के आस पास,
उसी तरह मुझे तेरा एहसास चाहिये...
ऐ मेरे हम सफ़र मुझे तेरा ही साथ चाहिये...

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