Wednesday, October 20, 2010

अधूरे अरमान....


क्यों हम इन राहो पर आज इतने तन्हा है....
ज़िन्दगी के हर पल मुझे से हैरां है....
राहों पे चलते हुए सोचा करते है...
क्यों मेरा ही साया मुझसे परेशान है...

ये दिल भी चाहता है हँसना...
किसी कि बातो पे हैरां होना...
लेकिन क्यों ये दिल उन...
सारी खुशियों से अनजान है...

क्यों मै अपने अरमानो को...
आसमानों कि सैर कराने से डरती हूँ...
जबकि चारो तरफ मेरे....
खुशियों का सामान है....

हर पल बस इंतज़ार में कटता है....
कि वो लम्हे फिर इस ज़िन्दगी में...
शामिल हो जाए....
लेकिन जानता है ये दिल...
कि ये बस अधूरे अरमान है....






Saturday, October 9, 2010

क्या लिखूं....


लिखना बहुत है लेकिन क्या लिखूं...
पाती लिखूं या किताब लिखूं...
दिल का सारा दर्द कहूँ या....
दिल के सारे अरमान लिखूं....
ज़िन्दगी अधूरे ख्वाबों की बारात है....
आज इसके हर पल का हिसाब लिखूं...
चंद लम्हों में ले गया वो साँसे किसी की....
फिर कैसे गुजरे दिन और रात लिखूं....
खुशियाँ क्या होती है ज़िन्दगी में.....
इन्हें चंद लम्हों की सौगात लिखूं....
दिल का धडकना लिखूं....
या इसे किसी का इंतज़ार लिखूं...
अश्क जो बहा करते है आँखों से उन्हें...
किसी की यादों का एहसास लिखूं...
इस कदर घुटती जाती है ज़िन्दगी किसी की....
कैसे बसर होते है किसी के लम्हात लिखूं...