Saturday, March 20, 2010

हर पल बदलती ज़िन्दगी...


ज़िन्दगी बदलती है रंग नये...
रोज दिखाती है ये ढंग नये...
हर पल कांटो भरी सेज ही क्यों...
क्यों नहीं बुनती है ये ख्वाब नये...

पलकों पे कुछ सपने हो...
संग हमारे कुछ अपने हो...
पर फिर भी क्यों नहीं जगती है ये एहसास नये....

कभी तो ढेरो खुशियाँ देती है
तो दूजे पल आँखों में आंसू भर देती है...
पर क्यों नहीं सिखाती है ये जीने के अंदाज नये...

जब हर पल एक याद है ...
और हर किसी के लबो पर बस एक ही फ़रियाद है...
तो क्यों जगाती है ये हर रोज एहसास नये...

जब हर सपनो का टूटना तय है...
और किसी अपने का रूठना तय है...
तो क्यों देती है ये हर पल साथ नये...

ज़िन्दगी तू यु ही तनहा रहती तो अच्छा था...
तुझमे कोई जीने की आस ना रहती तो अच्छा था...
कम से कम कोई ना दे पाता तुझे हर पल इक इल्जाम नये...

12 comments:

  1. ज़िन्दगी बदलती है रंग नये...
    रोज दिखाती है ये ढंग नये...
    हर पल कांटो भरी सेज ही क्यों...
    क्यों नहीं बुनती है ये ख्वाब नये...
    bahut sundar----jeevan kee sachchaayee bayan karatee rachana.hindi blog jagat men apka svagat karate huye khushee ho rahee hai.

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  2. अच्छे भाव सुंदर कविता

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  3. sundar bhaav, sundar kavita.
    shubhkamnao ke sath swagat hai hindi blog jagat me,

    dekh kar khushi hui ki raipur se ek aur blog aa gaya hai...

    welcome

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. जब हर सपनो का टूटना तय है...
    और किसी अपने का रूठना तय है...
    तो क्यों देती है ये हर पल साथ नये...
    Bahut sundar!

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  6. ज़िन्दगी बदलती है रंग नये...
    रोज दिखाती है ये ढंग नये...
    हर पल कांटो भरी सेज ही क्यों...
    क्यों नहीं बुनती है ये ख्वाब नये...
    Bunegi...aapke liye sundar khwab zaroor bunegi!

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  7. dhanyawaad aap sabhi ka... acha lagta hai jab koi rachna kisi ke dwara pasand ki jaati hai...

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  8. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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  9. हंस कर जी कर सुमन बन,
    सपने कर आबाद |
    इस सुमन का मोल क्या,
    मुरझाने के बाद||

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  10. Bahut khoob!! sundar shabd aur chitr bhee!!

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  11. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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